उत्पत्ति और रिसर्च: इस फसल का मूल क्या है और इस पर क्या शोध हुए हैं?
खेती कौन और कैसे कर सकता है: इस खेती के लिए कौन पात्र है और इसकी प्रक्रिया क्या है?
उपयुक्त मिट्टी और जलवायु: किस मिट्टी में सबसे अधिक पैदावार होती है?
फसल का रखरखाव: पौधों की देखभाल के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
पोषण और फायदे: काले टमाटर में कौन से पोषक तत्व होते हैं और यह 'सुपरफूड' क्यों है?
छोटे स्तर पर शुरुआत: कम निवेश में इसे कैसे शुरू करें?
लाभ और कमाई: इस फसल से कितना मुनाफा हो सकता है?
किसानों के लिए नई लाभदायक फसल: ₹1000 किलो बिकने वाला 'काला टमाटर' बना कमाई का जरिया खेती-किसानी में जब कुछ नया करने का जज्बा हो, तो मिट्टी भी सोना उगलने लगती है। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के एक प्रगतिशील किसान ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। उन्होंने पारंपरिक लाल टमाटर को छोड़कर अमेरिका की खास वैरायटी 'काले टमाटर' की खेती शुरू की है, जो बाजार में 1000 रुपये किलो तक बिक सकता है। 1. कहां से आया यह काला टमाटर? काले टमाटर की इस किस्म का आविष्कार करीब 2015 के आसपास अमेरिका में हुआ था। अनिल वर्मा ने बहरीन के एक रिसर्च पेपर में इसके औषधीय गुणों के बारे में पढ़ा। शोध बताते हैं कि यह टमाटर न केवल कैंसर और मोटापे जैसी बीमारियों से लड़ने में सक्षम है, बल्कि इसमें साधारण टमाटर के मुकाबले कई गुना ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। 2. कौन कर सकता है इसकी खेती? इसकी खेती कोई भी किसान कर सकता है, जिसके पास नई तकनीक सीखने का धैर्य हो। अनिल वर्मा खुद एमएससी (बॉटनी) हैं, लेकिन उनका कहना है कि अगर सही बीज और सही जानकारी हो, तो कोई भी जागरूक किसान इसे अपना सकता है। 3. कैसी मिट्टी और माहौल है जरूरी? काले टमाटर के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
धूप का महत्व: इसके काले रंग का रहस्य धूप में छिपा है। पौधों को जितनी अच्छी धूप मिलेगी, फल का रंग उतना ही गहरा काला होगा। अगर धूप कम मिली, तो टमाटर पूरी तरह काला नहीं हो पाएगा।
4. खेती की प्रक्रिया और रखरखाव इसकी खेती काफी हद तक सामान्य टमाटर जैसी ही है, लेकिन कुछ बारीकियां हैं:
बीज का चयन: इसकी दो किस्में होती हैं—एक 'चेरी टाइप' (छोटा) और दूसरा बड़े आकार वाला।
देखभाल: पौधों को सहारा देने के लिए स्टेकिंग (लकड़ियों का सपोर्ट) जरूरी है। समय-समय पर संतुलित खाद और सिंचाई का ध्यान रखना पड़ता है ताकि फल का वजन 300-400 ग्राम तक पहुंच सके।
5. यह 'सुपरफूड' क्यों है? काले टमाटर का गहरा रंग इसमें मौजूद 'एंथोसायनिन' के कारण होता है। यही तत्व ब्लूबेरी और जामुन में भी पाया जाता है। इसमें विटामिन A और C की प्रचुर मात्रा होती है, जो इम्यूनिटी बढ़ाने और आंखों की रोशनी के लिए वरदान है। 6. छोटे स्तर पर कैसे करें शुरुआत? अगर आप नए हैं, तो सीधे बड़े खेत में इसे न लगाएं।
अनिल वर्मा ने भी सिर्फ 60-70 बीजों से शुरुआत की, जिसकी कीमत करीब 3000 रुपये थी।
पहले कुछ कतारों में ट्रायल करें ताकि आप अपने क्षेत्र की मिट्टी और मौसम के साथ इसके तालमेल को समझ सकें। एक बार जब आपको पौधों की आदत समझ आ जाए, तब इसे एक या दो एकड़ में फैलाएं।
7. कमाई और मुनाफा लाल टमाटर का भाव अक्सर गिरकर 10-20 रुपये किलो तक आ जाता है, जिससे किसानों की लागत भी नहीं निकलती। इसके उलट, काला टमाटर अपनी खूबियों के कारण बड़े शहरों (दिल्ली, मुंबई, इंदौर) के प्रीमियम मार्केट और ऑर्गेनिक स्टोर्स में 500 से 1000 रुपये किलो तक बिकता है। कम लागत और कम जगह में यह फसल आपको लखपति बना सकती है। किसानों और किसानी का बदलता स्वरूप आगे की राह: खेती अब सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि एक हाई-प्रोफाइल बिजनेस बन सकती है। बैतूल के काले टमाटर ने यह साबित कर दिया है कि अगर किसान तकनीक और रिसर्च का हाथ थाम ले, तो आसमान की ऊंचाइयां छूना मुश्किल नहीं है। इस तरह की अन्य रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारियों से अपडेट रहने के लिएexamintro.comके साथ जुड़े रहें। यदि आप किसी अन्य विषय के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो कृपया नीचे दिए गएकमेंट बॉक्समें अपना प्रश्न पूछ सकते हैं। साथ ही, यदि आपके पास हमारे लिए कोई सुझाव है, तो उसे भी ज़रूर साझा करें—हमें आपके फीडबैक का इंतज़ार रहेगा!
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