उत्तर प्रदेश के मंडल और जिले
प्रस्तावना
यदि आप उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC), समीक्षा अधिकारी (RO/ARO), उत्तर प्रदेश पुलिस या अन्य किसी भी राज्य स्तरीय सरकारी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक संरचना को समझना अत्यंत आवश्यक है। साक्षात्कार और लिखित परीक्षा दोनों में ही मंडल (संभाग) और जिलों की संख्या, उनके गठन और पुनर्गठन से जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। इस लेख में हम उत्तर प्रदेश के मंडल और जिलों का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।
उत्तर प्रदेश: एक प्रशासनिक परिचय (वर्तमान स्थिति)
वर्तमान समय में प्रशासनिक दृष्टिकोण से उत्तर प्रदेश भारत के सबसे बड़े राज्यों में से एक है। शासन की सुविधा के लिए राज्य को मंडलों और जिलों में विभाजित किया गया है।
- कुल मंडल (संभाग) की संख्या: 18
- कुल जिलों (जनपद) की संख्या: 75
- सबसे नया मंडल: अलीगढ़ (18वां मंडल, जिसका गठन 2008 में हुआ)
ऐतिहासिक परिदृश्य: गठन, पुनर्गठन और विभाजन
उत्तर प्रदेश की सीमाओं और प्रशासनिक इकाइयों में समय-समय पर बदलाव हुए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर 1950, 1956 और 2000 के समय की स्थितियों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
1. गठन के समय (24 जनवरी 1950)
जब 24 जनवरी 1950 को 'संयुक्त प्रांत' का नाम बदलकर 'उत्तर प्रदेश' किया गया, तब से लेकर 1956 के राज्य पुनर्गठन आयोग तक राज्य में जिलों और मंडलों की संख्या में कई बार परिवर्तन हुए।
2. राज्य पुनर्गठन (1 नवंबर 1956)
1 नवंबर 1956 को जब राज्यों का पुनर्गठन हुआ, उस समय उत्तर प्रदेश में 51 जिले थे। इसके बाद प्रशासनिक आवश्यकताओं को देखते हुए नए जिले बनाए जाते रहे।
3. उत्तराखंड विभाजन के समय (9 नवंबर 2000)
यह उत्तर प्रदेश के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण तारीखों में से एक है। 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश का विभाजन करके 'उत्तरांचल' (वर्तमान उत्तराखंड) का निर्माण किया गया।
- विभाजन से पूर्व: विभाजन से ठीक पहले उत्तर प्रदेश में मंडलों और जिलों की संख्या अधिक थी।
- विभाजन का प्रभाव: उत्तर प्रदेश के हिमालयी क्षेत्र के 13 जिलों और 2 मंडलों (गढ़वाल और कुमाऊं) को अलग करके उत्तराखंड राज्य बना दिया गया।
- विभाजन के बाद: उत्तराखंड बनने के बाद उत्तर प्रदेश में 70 जिले शेष रह गए थे (जो बाद में बढ़कर 75 हो गए)।
उत्तर प्रदेश के 18 मंडल और उनके जिले
प्रशासनिक सुविधा के लिए 75 जिलों को 18 मंडलों में बांटा गया है। परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है कि कौन सा जिला किस मंडल के अंतर्गत आता है।
- लखनऊ मंडल: लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी। (सर्वाधिक 6 जिले)
- कानपुर मंडल: कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, फर्रुखाबाद, कन्नौज, औरैया। (सर्वाधिक 6 जिले)
- मेरठ मंडल: मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, गौतमबुद्ध नगर, बागपत, हापुड़। (सर्वाधिक 6 जिले)
- अयोध्या मंडल: अयोध्या, बाराबंकी, सुल्तानपुर, अमेठी, अम्बेडकर नगर।
- अलीगढ़ मंडल: अलीगढ़, एटा, हाथरस, कासगंज।
- आगरा मंडल: आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी।
- वाराणसी मंडल: वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली।
- गोरखपुर मंडल: गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर।
- देवीपाटन मंडल (मुख्यालय: गोंडा): गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच।
- बरेली मंडल: बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत।
- मुरादाबाद मंडल: मुरादाबाद, रामपुर, बिजनौर, अमरोहा, संभल।
- प्रयागराज मंडल: प्रयागराज, प्रतापगढ़, फतेहपुर, कौशाम्बी।
- चित्रकूट धाम मंडल (मुख्यालय: बांदा): बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा।
- मिर्जापुर मंडल: मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही।
- आजमगढ़ मंडल: आजमगढ़, मऊ, बलिया।
- बस्ती मंडल: बस्ती, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर।
- झांसी मंडल: झांसी, ललितपुर, जालौन।
- सहारनपुर मंडल: सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली।
परीक्षा के लिए अति महत्वपूर्ण तथ्य (स्मरण रखने योग्य)
- सबसे बड़ा मंडल: जिलों की संख्या के आधार पर लखनऊ, कानपुर और मेरठ सबसे बड़े मंडल हैं। इन तीनों में 6-6 जिले शामिल हैं।
- सबसे छोटा मंडल: मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, झांसी और सहारनपुर में केवल 3-3 जिले हैं।
- नवीनतम मंडल: अलीगढ़ मंडल का सृजन 2008 में आगरा मंडल से अलग करके किया गया था।
- क्षेत्रफल में सबसे बड़ा जिला: लखीमपुर खीरी।
- क्षेत्रफल में सबसे छोटा जिला: हापुड़।
- मुख्यालय से भिन्न नाम वाले जिले: कई बार मिलान करने वाले प्रश्न आते हैं।
- अमेठी का मुख्यालय: गौरीगंज
- संत कबीर नगर का मुख्यालय: खलीलाबाद
- गौतमबुद्ध नगर का मुख्यालय: नोएडा
- कौशाम्बी का मुख्यालय: मंझनपुर
- अम्बेडकर नगर का मुख्यालय: अकबरपुर
- कुशीनगर का मुख्यालय: पडरौना
- कानपुर देहात का मुख्यालय: अकबरपुर माती
- सिद्धार्थनगर का मुख्यालय: नौगढ़
- सोनभद्र का मुख्यालय: रॉबर्ट्सगंज
- जालौन का मुख्यालय: उरई
- फर्रुखाबाद का मुख्यालय: फतेहगढ़
- संभल का मुख्यालय: पवासा
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था न केवल राज्य के शासन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी यह एक अनिवार्य विषय है। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे इन 18 मंडलों और 75 जिलों की स्थिति को मानचित्र के माध्यम से भी समझें, ताकि तथ्यों को याद रखने में आसानी हो। यह ब्लॉग पोस्ट आपकी तैयारी को सही दिशा देने के उद्देश्य से लिखी गई है।
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